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जांजगीर

हर्बल रंगों के साथ मनाएं होली, केमिकल से दूर रहें—-डॉ. मंजू भट्ट

रंगों का त्योहार होली खुशियों, उमंग और मेल-मिलाप का प्रतीक है। यह पर्व जितना रंगीन और आनंदमय होता है, उतना ही हमारी त्वचा, बालों और स्वास्थ्य के लिए भी सावधानी की मांग करता है। डा सीवी रमन यूनिवर्सिटी कोटा की सहायक प्राध्यापक डॉ मंजू भट्ट ने बताया की आजकल बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंग (केमिकल कलर्स) त्वचा संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन, एलर्जी और यहां तक कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। ऐसे में हमें प्राकृतिक हर्बल रंगों को अपनाना चाहिए, जो न केवल हमारी सेहत के लिए सुरक्षित हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक हैं।

रासायनिक रंगों से होने वाले खतरे

बाजार में बिकने वाले अधिकांश रंगों में सीसा (Lead), पारा (Mercury), डाई, केरोसिन और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं। ये तत्व त्वचा को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आंखों और सांस की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। कई रंगों में मौजूद भारी धातुएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक को जन्म दे सकती हैं।

हर्बल रंग: एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प

हर्बल रंगों का उपयोग करने से न केवल आपकी त्वचा सुरक्षित रहती है, बल्कि यह पर्यावरण को भी किसी तरह की क्षति नहीं पहुंचाते। इन्हें घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है।

घर पर हर्बल रंग बनाने के आसान तरीके:

गुलाबी रंग: चुकंदर के रस को सुखाकर या गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर बनाया जा सकता है।
पीला रंग: हल्दी और बेसन का मिश्रण, गेंदे के फूलों का पाउडर।
हरा रंग: मेंहदी और पालक के पत्तों को सुखाकर बनाया जा सकता है।
लाल रंग: टेसू के फूलों को पानी में भिगोकर या सूखे फूलों का पाउडर।
नीला रंग: जकरंदा या नील के फूलों का उपयोग।

होली खेलते समय रखें ये सावधानियां

सुगंधित और प्राकृतिक हर्बल रंगों का ही उपयोग करें।
आंखों और त्वचा पर जबरदस्ती रंग लगाने से बचें।
तैलीय या मॉइश्चराइज़र लगी त्वचा पर रंगों का असर कम होता है, इसलिए पहले त्वचा पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं।
पानी की बर्बादी न करें, सूखी होली खेलने का प्रयास करें।
होली खेलने के बाद त्वचा को माइल्ड साबुन और गुनगुने पानी से साफ करें।

संस्कृति बचाएं, पर्यावरण बचाएं

होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा है। यदि हम प्राकृतिक रंगों का उपयोग करेंगे, तो यह केवल हमारी त्वचा और सेहत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

इस बार होली पर हर्बल रंगों के साथ प्राकृतिक आनंद लें और रासायनिक रंगों से पूरी तरह दूरी बनाएं। सुरक्षित होली मनाएं, खुशहाल रहें!

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