
श्री सिद्ध तंत्र पीठ भैरव मंदिर रतनपुर में सावन महोत्सव की तैयारी जोरों पर 5 लाख पार्थिव शिवलिंग का होगा महारुद्राभिषेक प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का निर्माण अंतिम में 5 लाख शिवलिंग का होगा रुद्रा महा अभिषेक गुप्त नवरात्रि में 2 लाख पचास हजार बन गए है शेष बनना बाकी है सावन मास में स्फटिक शिवलिंग का रुद्राभिषेक एवं शाम को रुद्र महायज्ञ आहुति नमक चमक विधि से एवं महामृत्युंजय का पाठ

*पार्थिव शिवलिंग पूजा*
पं.जगेस्वर अवस्थी ने बताया कि कामना के अनुसार पार्थिवलिंगों की पूजा करना चाहिए , अधिक संख्या में अर्चन तो निश्चय ही फलदायी होता है। प्रथम आवाहन, तब प्रतिष्ठा, तदनन्तर सभी लिंगोंका पूजन अलग-अलग करना चाहिये। लिंगोंका आकार तो एक समान ही रखना चाहिये-
विद्या प्राप्ति की कामना से पुरुष भक्ति पूर्वक एक हजार पार्थिव शिवलिंगों का पूजन करे। इससे निश्चय ही उस फलकी प्राप्ति हो जाती है। धन चाहनेवाले पुरुषको उसके आधे (पाँच सौ), पुत्र चाहने वाले को डेढ़ हजार और वस्त्रोंकी आकांक्षा वाले को पाँच सौ शिवलिंगोंका पूजन करना चाहिये

मोक्षकी कामना वाले व्यक्ति को एक करोड़, भूमि की अभिलाषा वाले को एक हजार, दया प्राप्ति की इच्छा वाले को तीन हजार और तीर्थाटन की इच्छा वालेको दो हजार शिवलिंगों की पूजा करनी चाहिये। मित्र प्राप्ति की इच्छा वाले को तीन हजार तथा अभिचार कर्मोंमें पाँच सौसे लेकर एक हजार तक पार्थिव शिवलिंगों के पूजन की विधि है। (कारागार आदि के) बन्धन से छुटकारे की इच्छा से एक लाख तथा राज भय से मुक्ति की इच्छा से पाँच सौ शिवलिंगों का पूजन बुद्धिमानों को करना चाहिए
शिवमहापुराण मे वर्णडित
चोर आदि के संकट से बचने के लिये दो सौ और डाकिनी आदि के भयसे मुक्ति हेतु पाँच सौ पार्थिव शिवलिंगों का पूजन बताया गया है। दरिद्रता से छुटकारा के लिये पाँच हजार और सभी कामनाओं की सिद्धि के लिये दस हजार पार्थिव शिवलिंगोंका पूजन करना चाहिये। नित्य पूजन विधि भक्ति भाव से आप लोग एक पार्थिव लिंग का नित्य पूजन पापों का नाश करने वाला और दो लिंगों का पूजन अर्थ की सिद्धि करने वाला बताया गया है। तीन लिंगों का पूजन सभी कामनाओं की सिद्धि का देने वाले मुख्य हेतु कहा गया है। पूर्वमें बतायी गयी संख्या विधिमें भी उत्तरोत्तर संख्या अधिक फलदायिनी होती है। अन्य मुनियों के मत से संख्या का जो अन्तर है,
बुद्धिमान् मनुष्य दस हजार पार्थिव शिव लिंगों का अर्चन करके महान् राजभय से भी मुक्त होकर निर्भय हो जाता है। कारागार आदि से छूटने के लिये 1 लाख लिंगों का अर्चन करना चाहिये और डाकिनी आदिके भयसे छूटनेके लिये सात हजार लिंगार्चन कराना चाहिये पुत्रहीन पुरुष पचपन हजार लिंगार्चन करे, कन्या-सन्तान की प्राप्ति दस हजार लिंगार्चनसे हो जाती है। दस हजार लिंगार्चनसे विष्णु आदि देवोंके समान ऐश्वर्य प्राप्त हो जाता है। दस लाख शिवलिंगार्चन से अतुल सम्पत्ति प्राप्त हो जाती है जो मनुष्य पृथ्वी पर एक करोड़ शिवलिंगों का पूजन करता है और जमीन पर सोता है, वह तो शिवरूप ही हो जाता है ।



