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छत्तीसगढ़ / मध्यप्रदेश

लिंकेज कोयला की कालाबाजारी

लोरमी के सुरेश कोल डिपों में जारी है अवैध काम

बिलासपुर-कोयला की कालाबाजारी प्रदेश में नई बात नहीं है। हैरानी की बात तो तब है जब लिंकेज का कोयला बड़े धडल्ले से मिली-भगत कर खपाया जा रहा है। 2 माह के भीतर 200 ट्रेलर लिंकेज का कोयला खपा दिया गया। अब इसकी शिकायत खनिज संसाधन विभाग रायपुर से की गई है।

लोरमी पंडरिया क्षेत्र में कोल डिपो के लाइसेंस जारी किया गया है। बिलापुर सहित कई उद्योगो के नाम पर सुरेश कोल डिपो में लिंकेज का कोयला आ रहा है। सवाल यह है कि जब लोरमी में उद्योग नहीं है तो बिलासपुर के उद्योग के कोयले लोरमी से फिर बिलासपुर कैसे खपाया जा रहा है। पंडरिया क्षेत्र के वार्ड 11 में मेनपुरा में लिंकेज कोयला को बेचा जा रहा है। इससे शासन को करोड़ो की राजस्व हानि हो रही है।
क्या है नियम..
लिंकेज का कोयला स्टील और पावर प्लांट के लिए सब्सीडी में दी जाती है। कोयले के प्लांट में भेजा जाता है। अब इस कोयले को दुसरे कंपनी के नाम से लाकर इंट भट्टो में खुले आम बिक्री कर प्रति टन हजारों रुपय की अवैध कमाई की जा रही है। कई स्थानों पर माइनिंग बेरियर है इसके बाद भी मिली-भगत से पंडरिया क्षेत्र में कोयला पहुंच रहा है। इतना ही नहीं कोल डिपो मुख्य मार्ग से कम से कम 300 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए लेकिन जहां कोल डिपो का संचालन हो रहा है वह मुख्य मार्ग पर भी है।

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