
मुंगेली- मुंगेली जिला अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ समृद्ध साहित्यिक परंपरा के लिए भी जाना जाता है। आगर और मनियारी नदी के पावन तट वर्षों से साहित्य, संस्कृति और लोकचेतना के सशक्त केंद्र रहे हैं। इन दोनों अंचलों ने अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, भाषाविद और रचनाकार दिए, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आगर क्षेत्र से डॉ. विनय कुमार पाठक, बृजलाल शुक्ल, केदार सिंह परिहार, विष्णु तिवारी, डॉ. प्रेम कुमार वर्मा, कृष्ण कुमार भट्ट ‘पथिक’, अखेचंद ‘क्लांत’, सीताराम नामदेव, डॉ. अजीज रफीक, पं. ध्वंसावशेष त्रिपाठी, स्वराज तिवारी, पं. रामशरण शर्मा, प्रेम आर्य और मनोज अग्रवाल जैसे साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया।
वहीं मनियारी तट ने बुधराम यादव, मंतराम यादव, हरिश्चंद्र वाद्यकार, स्वर्गीय भागवत प्रसाद पाण्डेय, स्वर्गीय महंत अशोक कुमार दास, स्वर्गीय रामानुज नामदेव, स्वर्गीय राकेश मिश्रा, स्वर्गीय दुलारदास जांगड़े, खेमराज तिवारी, अजय शुक्ला और अशोक तिवारी जैसे साहित्य साधकों को जन्म दिया, जिन्होंने लोरमी की साहित्यिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
आज भी मुंगेली जिले में अनेक साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से कविता, कहानी, गीत, ग़ज़ल, लोक साहित्य और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। इनमें राकेश गुप्त ‘निर्मल’, डॉ. सत्यनारायण तिवारी ‘हिमांशु’, डी.एल. भास्कर ‘मुंगेलिहा’, डॉ. बी.पी. निषाद, देवेन्द्र परिहार, देव गोस्वामी, डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, सागर सिंह बैस, शरद डडसेना, सूरज तिवारी ‘मलय’, संस्कार साहू, डॉ. दिलीप सिंह राजपूत सहित अनेक साहित्यकार शामिल हैं।
जिले में आगर साहित्य समिति, मुंगेली (अध्यक्ष– देवेन्द्र परिहार), मनियारी साहित्य एवं सेवा समिति, लोरमी (अध्यक्ष– डॉ. सत्यनारायण तिवारी ‘हिमांशु’) तथा ‘कविता चौराहे पर’ जैसे साहित्यिक मंच लगातार साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन कर नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक डी.एल. भास्कर ‘मुंगेलिहा’ भी प्रदेशभर के साहित्यकारों को जोड़ने और साहित्यिक आयोजनों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुंगेली की यह साहित्यिक परंपरा केवल इतिहास की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान में भी नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और लोकचेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनी हुई है।



