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श्रीमद् देवीभागवत महापुराण कथा — आयु, आरोग्य, पुष्टि, सिद्धि एवं आनंद की दिव्य कथा

श्रीमद् देवीभागवत महापुराण कथा — आयु, आरोग्य, पुष्टि, सिद्धि एवं आनंद की दिव्य कथा

22 सितम्बर से 01 अक्टूबर तक महामाया मंदिर प्रांगण, रतनपुर में आयोजन

रतनपुर- श्रीमद् देवीभागवत महापुराण कथा एक दिव्य आयोजन है, जो आयु, आरोग्य, पुष्टि, सिद्धि और आनंद प्रदान करने वाली तथा मोक्ष का मार्ग दिखाने वाली मानी जाती है। यह आयोजन 22 सितम्बर से 01 अक्टूबर तक ऐतिहासिक महामाया मंदिर प्रांगण, रतनपुर में हो रहा है।

कथा व्यास आचार्य पंडित झम्मन शास्त्री जी महाराज प्रतिदिन प्रवचन व्याख्यान माला में भक्तों को संबोधित करते हुए माँ भगवती की महिमा का गुणगान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “मा भगवती की उपासना अनादि काल से चली आ रही है। सृष्टि के विस्तार के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भी शक्ति की आवश्यकता पड़ी। देवी की आराधना, पूजन, जप और पाठ से समस्त व्यथा मिट जाती है तथा जीवात्मा को आवागमन के बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है।”

आचार्यश्री ने कहा कि नवरात्र पर्व का यह नौ दिन का दुर्लभ समय साधना, भक्ति और समाज व राष्ट्र कल्याण के लिए सात्विक भाव से कार्य करने का अवसर है। माँ भगवती दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान करते हुए यदि हम नौ प्रकार के दोषों — काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष, दंभ, पाखंड और अहंकार — का त्याग करें तो जगदम्बा माँ शीघ्र ही प्रसन्न होती हैं।

उन्होंने समाज में बढ़ते दुर्व्यसन, मादक द्रव्यों और तामस प्रवृत्तियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नवरात्र पर्व का उद्देश्य सात्विक आहार, सत्य-सदाचार, संयम, सद्भाव और भाईचारे की स्थापना करना है। जिस प्रकार माँ दुर्गा ने महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड, मधु-कैटभ और अन्य दानवों का संहार कर देव समाज और भक्तों की रक्षा की, उसी प्रकार आज भी हमें अपने भीतर के दानवों को पराजित करने की आवश्यकता है।

कथा के दौरान उन्होंने यज्ञ की पूर्णाहुति हेतु शाकल्य की विधि भी बताई। उन्होंने बताया कि अधिक मात्रा में तिल का आधा चावल, पर्याप्त जौ, घृत, गुड़, शक्कर, कमलगट्टा, चन्दन चूर्ण, जटामासी, गुग्गुल एवं धूप का मिश्रण कर शास्त्रीय प्रमाण से शाकल्य बनाना चाहिए, जिससे माँ भगवती प्रसन्न होती हैं।

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