राशन दुकानदारों का फूटा आक्रोश: 20 साल से नहीं बढ़ा कमीशन, 7 सूत्रीय मांगों को लेकर खाद्य सचिव और उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

14 हजार से अधिक उचित मूल्य दुकान संचालकों का दावा—मार्जिन मनी समेत कई योजनाओं का भुगतान लंबित, 14.93 करोड़ रुपये जारी होने की जानकारी
रायपुर/पंडरिया-कवर्धा, -छत्तीसगढ़ के शासकीय राशन दुकानदारों और विक्रेताओं ने कमीशन वृद्धि, लंबित भुगतान और राशन उपभोक्ताओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार के सामने अपनी आवाज बुलंद की है। शासकीय राशन दुकानदार एवं विक्रेता कल्याण संघ छत्तीसगढ़ ने खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और उपमुख्यमंत्री अरुण साव को 7 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर शीघ्र समाधान की मांग की है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष देवर्ष भाई सापरिया, प्रदेश महासचिव विजय धृतलहरे और कार्यकारी अध्यक्ष विजय राठौर के नेतृत्व में विभिन्न जिलों के पदाधिकारी महानदी भवन और इन्द्रावती भवन, नया रायपुर पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक फरिहा आलम सिद्दीकी और अपर संचालक से मुलाकात कर उचित मूल्य दुकान संचालकों की समस्याएं रखीं।

संघ पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की 14,109 उचित मूल्य दुकानों के संचालक लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले 20 वर्षों में कमीशन में एक पैसे की भी वृद्धि नहीं हुई है, जबकि दुकानदारों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां बढ़ाई जा रही हैं।
कई मदों का भुगतान लंबित होने का आरोप
संघ ने कहा कि कमीशन वृद्धि, क्षतिपूर्ति, वित्तीय पोषण, मध्याह्न भोजन, पूरक पोषण, अमृत नमक मार्जिन मनी, एडिशनल मार्जिन राशि सहित विभिन्न योजनाओं की राशि वर्षों और महीनों से लंबित है। इससे दुकान संचालकों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। कई दुकानदार दुकान संचालन छोड़ने या इस्तीफा देने तक की स्थिति में पहुंच गए हैं।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने मांगों पर सकारात्मक चर्चा करते हुए समाधान की दिशा में पहल का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि लंबित मार्जिन मनी भुगतान के लिए 14 करोड़ 93 लाख 17 हजार 986 रुपये की राशि जारी कर दी गई है। यह राशि प्रदेश के सभी जिलों के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारियों के खातों में स्थानांतरित की जा रही है।
ओटीपी व्यवस्था बंद करने का मुद्दा भी उठा
संघ ने राशन वितरण में ओटीपी व्यवस्था बंद किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। पदाधिकारियों का कहना था कि प्रदेश के 80 लाख 98 हजार 107 राशनकार्डधारकों को इस व्यवस्था से सुविधा मिल रही थी, इसलिए इसे जारी रखा जाना चाहिए।
इस पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ओटीपी आधारित वितरण प्रणाली बंद करने का निर्णय भारत सरकार स्तर पर लिया गया है और इसमें राज्य सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।
खाद्य मंत्री से नहीं हुई मुलाकात, उपमुख्यमंत्री को सौंपा मांगपत्र
खाद्य मंत्री के प्रवास पर होने के कारण संघ प्रतिनिधिमंडल की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव से भेंट कर सभी मांगों और समस्याओं की जानकारी दी। उपमुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
इस दौरान बिलासपुर जिला अध्यक्ष रवि परयानी, महासचिव मनीष टंडन, खैरागढ़-गंडई से संतोषी देवांगन एवं रेखचंद साहू, दुर्ग जिला अध्यक्ष खिलावन साहू, वीरेन्द्र चंद्राकर, जीपीएम जिला अध्यक्ष संजय राठौर, कवर्धा ब्लाक अध्यक्ष रामगणेश निषाद, सहसचिव इमरान खान सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में उचित मूल्य दुकान संचालक उपस्थित रहे।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया और समय पर भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ, तो प्रदेशभर के राशन दुकानदार आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।



