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सुशासन तिहार में सवालों से बेचैनी? शिकायतों का पुलिंदा खुलते ही मचा हंगामा, जनता की सुनवाई रह गई अधूरी

सुशासन तिहार में सवालों से बेचैनी? शिकायतों का पुलिंदा खुलते ही मचा हंगामा, जनता की सुनवाई रह गई अधूरी

राजस्व अधिकारी रहे नदारद, शिकायत लेकर पहुंचे विपक्षी नेताओं को बाहर किया गया; फरियादी भटकते रहे समाधान की तलाश में

सिरगिट्टी। सुशासन तिहार में जनता अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंची थी, लेकिन कार्यक्रम में शिकायतों की सुनवाई से ज्यादा सवाल उठाने वालों को रोकने की चर्चा होती रही। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तिफरा-सिरगिट्टी के अध्यक्ष लक्ष्मीनाथ साहू क्षेत्र की विभिन्न शिकायतों और चर्चित मामलों का पुलिंदा लेकर मंच के सामने पहुंचे तो माहौल अचानक गरमा गया। आरोप है कि जैसे ही क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, कथित अवैध गतिविधियों और अन्य संवेदनशील मुद्दों का जिक्र शुरू हुआ, कार्यक्रम में मौजूद कुछ राजनीतिक चेहरे असहज नजर आने लगे।

बताया जा रहा है कि शिकायत पत्र में ऐसे कई मुद्दों का उल्लेख था जो लंबे समय से क्षेत्र में चर्चा का विषय रहे हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि यदि ये शिकायतें सीधे उच्च स्तर तक पहुंचतीं तो कई सवालों के जवाब देना मुश्किल हो सकता था। इसी बीच बड़ी संख्या में ग्रामीण राजस्व संबंधी शिकायतें लेकर पहुंचे, लेकिन एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी सहित संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति ने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी। भूमि विवाद, सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों में सुनवाई नहीं होने पर कई लोग मायूस लौट गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शिकायतों को लेकर शुरू हुई बहस जल्द ही विवाद में बदल गई। जिस मंच को जनता की समस्याएं सुनने के लिए बनाया गया था, वहां सवाल उठाने वालों को ही निशाने पर लिए जाने की चर्चा रही। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन का पूरा ध्यान व्यवस्था संभालने से ज्यादा विरोध कर रहे नेताओं को कार्यक्रम स्थल से हटाने पर केंद्रित दिखाई दिया।

घटनाक्रम के दौरान लक्ष्मीनाथ साहू के साथ धक्का-मुक्की होने और उनके गिरने की भी चर्चा रही। हालांकि उन्होंने दोबारा अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन अंततः उन्हें और उनके समर्थकों को कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर शिकायत लेकर पहुंचे कई नागरिकों ने निराशा जताई।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि सुशासन तिहार में जनता की शिकायतों का समाधान हुआ या फिर असहज सवालों को दबाने की कवायद ज्यादा नजर आई? क्योंकि मंच पर विवाद चलता रहा और कई फरियादी अपनी समस्याओं का जवाब मिलने का इंतजार करते रह गए।

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