
CG Bilaspur News:- क्या आदिवासी क्षेत्र में ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी बड़ी औद्योगिक परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है? क्या उपजाऊ कृषि भूमि को उद्योग के लिए उपयोग में लाने से पहले स्थानीय लोगों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व दिया गया? और जब एक बार ग्रामीणों के विरोध के चलते जनसुनवाई स्थगित हो चुकी थी, तो फिर उन्हीं सवालों के बीच दोबारा जनसुनवाई क्यों कराई जा रही है? अमाली में प्रस्तावित कोल वॉशरी को लेकर उठ रहे ये सवाल केवल एक गांव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पेसा कानून, पर्यावरण संरक्षण, किसानों के अधिकार और विकास की कीमत जैसे बड़े मुद्दों को भी सामने ला रहे हैं। अब सबकी निगाहें 19 जून की जनसुनवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
Bilaspur बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के ग्राम अमाली में प्रस्तावित कोल वॉशरी परियोजना को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्र में पेसा कानून लागू होने के बावजूद ग्रामसभा की सहमति के बिना परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
दरअसल, ग्राम अमाली में मेसर्स विराज अर्थ फ्यूजन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कोल वॉशरी स्थापित करने का प्रस्ताव है। परियोजना के लिए भूमि खरीदी जा चुकी है और प्रशासनिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। अब 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया है।
पहले भी विरोध के कारण टालनी पड़ी थी जनसुनवाई
ग्रामीणों ने बताया कि 22 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित जनसुनवाई की सूचना मिलते ही अमाली सहित आसपास के गांवों में विरोध शुरू हो गया था। लोगों का कहना था कि जिस भूमि पर कोल वॉशरी स्थापित की जा रही है वह उपजाऊ कृषि भूमि है, जिसे औद्योगिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाना किसानों के हितों के खिलाफ है।
विरोध इतना बढ़ा कि ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोगों ने नारेबाजी करते हुए धरना दिया था। लगातार बढ़ते विरोध के बाद प्रशासन को उस समय जनसुनवाई स्थगित करनी पड़ी थी।
अब 19 जून की सुनवाई पर फिर उठे सवाल
प्रशासन द्वारा 19 जून को दोबारा जनसुनवाई की तारीख तय किए जाने के बाद ग्रामीणों ने फिर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने ज्ञापन सौंपकर सुनवाई स्थगित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से पर्यावरण, खेती-किसानी, वन्यजीव और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और किसी भी स्थिति में कोल वॉशरी शुरू नहीं होने दी जाएगी।
भूमि उपयोग परिवर्तन पर भी उठाए सवाल
विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि जिस जमीन की खरीदी कृषि प्रयोजन के नाम पर की गई थी, उसका उपयोग अब औद्योगिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
पेसा कानून और ग्रामसभा के अधिकारों का मुद्दा
ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियों में कहा है कि ग्राम अमाली संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेसा एक्ट लागू है। ऐसे क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति और निर्णयों को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि परियोजना से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
कॉलेज और वन्यजीवों पर असर की आशंका
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रस्तावित कोल वॉशरी स्थल से करीब 200 मीटर की दूरी पर शासकीय महाविद्यालय संचालित है। ऐसे में धूल, प्रदूषण और भारी वाहनों की आवाजाही का सीधा असर विद्यार्थियों और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इसके अलावा ग्रामीणों ने दावा किया कि परियोजना स्थल से आचानकमार टाइगर रिजर्व लगभग 10 किलोमीटर की हवाई दूरी पर स्थित है। ऐसे में औद्योगिक गतिविधियों और प्रदूषण का प्रभाव वन्यजीवों तथा पर्यावरण पर भी पड़ने की आशंका है।
खेती, स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव को लेकर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि कोल वॉशरी से निकलने वाले धूलकण, प्रदूषित जल और औद्योगिक कचरे का असर आसपास की कृषि भूमि पर पड़ेगा, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
इसके साथ ही बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ने, कानून-व्यवस्था प्रभावित होने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में वृद्धि की आशंका भी जताई गई है।
जनसुनवाई स्थगित करने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनहित, पर्यावरणीय प्रभाव, ग्रामसभा के अधिकार और स्थानीय लोगों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए 19 जून को प्रस्तावित जनसुनवाई तत्काल स्थगित की जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।



