लोरमी-श्रीराम कथा आनंददायिनी सुखप्रदायिनी सम्पूर्ण जीवो के लिए विश्रादायिनी भी है।श्रीरामचरित मानस की रचना आत्मकल्याण जनकल्याण और विश्वकल्याण के उद्देश्य से भगवान भूतभावन शंकर जी ने किया है।उन्होने सम्पूर्ण जीवो के कल्याण के लिए उक्त कथामृत का वर्णन माता पार्वती से किया है।

ईश्वर का अंश होने के कारण जीव आनंद और सुख चाहता है।जबकि आनंद और सुख के दाता भगवान श्रीराम व उनकी दिव्य श्रीराम कथा है।इसमे दिए गए उपदेश संदेश और आदेश का पालन कर सभी अपने जीवन को कृतकृत्य और धन्य कर सकते है। उक्त विचार हाईस्कूल कोतरी मे चौदहवे वर्ष आयोजित श्रीरामचरित मानस सम्मेलन के पांचवे दिवस के प्रवचन के दौरान राज्यपाल सम्मान से सम्मानित शिक्षाविद साहित्यकार एवम कथावाचक डॉक्टर सत्यनारायण तिवारी हिमान्शु महाराज ने प्रवचन के दौरान व्यक्त किए ।उन्होने श्रीराम के वनवास प्रसंग पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। सम्मेलन को हनुमतद्वाराचार्य हनुमतपीठाधीस्वर जगद्गुरू स्वामी महावीर दास जी (झांसी)साध्वी लीला भारती (दतिया)राघवदास (ओरछा)एवम प्रफुल्ल पाण्डेय (प्रतापगढ)ने भी संबोधित किया। संचालन पंडित शिवकुमार पाण्डेय ने की।उक्त कार्यक्रम मे विद्यानंद चन्द्राकर लीलाधर सोनकर लोकनाथ शर्मा रमाकांत कश्यप महेन्द्र द्विवेदी शारदा साहू तोषन साहू दरबारी यादव ईश्वरी कश्यप पंडित राजेन्द्र शर्मा पंडित मणिकान्त पाठक सहित सैकडो श्रद्धालु उपस्थित थे।



