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अमरकंटक में राष्ट्रीय सेमिनार: डॉ. अलका यादव ने कोरवा जनजाति पर प्रस्तुत किया शोध व्याख्यान इंदिरा गांधी जनजातीय राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ब्योमकेश त्रिपाठी रहे मुख्य अतिथि

अमरकंटक (मध्य प्रदेश)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में संसाधन उपयोग और संरक्षण में जनजाति ज्ञान प्रणाली विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सेमिनार में बिलासपुर जिले से प्राचार्य डॉ. अलका यादव ने कोरवा जनजाति की महिला सशक्तिकरण पर अपना शोध व्याख्यान प्रस्तुत किया।

डॉ. अलका यादव ने कोरवा जनजाति की महिलाओं की सशक्तिकरण और उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहन शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार यह जनजाति अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को आज भी जीवित रखे हुए है। उन्होंने जनजाति की आजीविका, भाषा, पहनावा और त्योहारों के महत्व को रेखांकित किया।

इस राष्ट्रीय सेमिनार की अध्यक्षता भी डॉ. अलका यादव ने की, जिन्होंने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी जनजातीय राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति ब्योमकेश त्रिपाठी ने अपने संबोधन में कहा कि देश की लोक संस्कृति और आदिवासी जीवनशैली के संरक्षण के लिए ऐसे शोध संगोष्ठियों का आयोजन बेहद महत्वपूर्ण है।

जनजातीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर

सेमिनार में विभिन्न विद्वानों और शोधकर्ताओं ने आदिवासी समुदायों, लोककला, परंपरागत ज्ञान और जनजातीय जीवनशैली पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आदिवासी जीवन के विविध पहलुओं पर चर्चा करते हुए शोधार्थियों ने जनजातियों के संरक्षण हेतु ठोस उपायों की आवश्यकता जताई।

शोधार्थियों और विद्वानों की विशेष उपस्थिति

सेमिनार में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के विद्वानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अमरकंटक विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के संयोजक, बिरसा मुंडा के चेयर प्रोफेसर प्रसन्ना सामल, प्रोफेसर डॉ संजय कुमार यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे

इस राष्ट्रीय सेमिनार ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को एक नई पहचान देने के साथ ही इसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सार्थक पहल की।

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