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IAS विकास शील होंगे छत्तीसगढ़ के 12वें मुख्य सचिव !!

रायपुर, -: छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक दुनिया में बड़ा बदलाव तय हो चुका है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विकास शील (1994 बैच, छत्तीसगढ़ कैडर) राज्य के 12वें मुख्य सचिव बनने जा रहे हैं। राजधानी रायपुर और मंत्रालय के गलियारों में पिछले दो दिनों से इसी चर्चा ने सबसे ज़्यादा हलचल पैदा की है।

विकास शील फिलहाल मनीला स्थित एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) में कार्यरत थे। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 12 सितम्बर को उनका कार्यमुक्ति आदेश जारी किया और महज़ 24 घंटे के भीतर उन्हें मनीला से औपचारिक रूप से रिलीव भी कर दिया गया। अगले ही दिन बैंक में उनका विदाई कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। अब आदेश की औपचारिक प्रति राज्य सरकार तक पहुँचने भर की औपचारिकता बाकी है। सूत्रों के अनुसार विकास शील अगले सप्ताह रायपुर लौट सकते हैं और तत्पश्चात उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी।

विकास शील का प्रशासनिक सफर बेहद विविध और प्रभावशाली रहा है। मध्यप्रदेश कैडर में शुरुआती नियुक्ति के बाद 2000 में नए बने छत्तीसगढ़ कैडर में शामिल होकर उन्होंने कोरिया, बिलासपुर और रायपुर ज़िलों में कलेक्टर के रूप में कार्य किया। सादगी, कठोर परिश्रम और सधे निर्णयों के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। राज्य सचिवालय में उन्होंने स्कूल शिक्षा, खाद्य, सामान्य प्रशासन और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों की ज़िम्मेदारी संभाली। दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहते हुए कोविड महामारी की तैयारियों और प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद जल शक्ति मंत्रालय के जल जीवन मिशन के मिशन डायरेक्टर के रूप में ग्रामीण भारत में नल-जल योजना के व्यापक क्रियान्वयन की कमान भी संभाली।

जनवरी 2024 में वे एशियन डेवलपमेंट बैंक में तीन साल की प्रतिनियुक्ति पर मनीला पहुँचे थे। परंतु नौ महीने के भीतर ही राज्य की तात्कालिक प्रशासनिक आवश्यकताओं ने उन्हें फिर से छत्तीसगढ़ बुला लिया। उनके शीघ्र वापसी के पीछे सरकार की मंशा साफ है कि रजत जयंती वर्ष में राज्य को एक मज़बूत और अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व मिले।

दिलचस्प पहलू यह भी है कि विकास शील की पत्नी निधि छिब्बर (आईएएस 1994 बैच) भी उच्च पदस्थ अधिकारी हैं। हाल ही में उन्हें नीति आयोग में पदस्थ किया गया है। इससे पहले वे विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) की महानिदेशक रहीं। पति-पत्नी दोनों की समानांतर ऊँचे पदों पर तैनाती को नौकरशाही जगत में एक अनूठी स्थिति माना जा रहा है।

1969 में जन्मे विकास शील इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की है। 4 सितम्बर 1994 को उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा जॉइन की थी। तकनीकी दृष्टि, प्रशासनिक अनुभव और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण का दुर्लभ संयोजन उनकी पहचान है।

राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार आने वाले हफ्तों में रायपुर पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली के लागू होने की तैयारी, बस्तर में बड़े निवेश प्रस्तावों का क्रियान्वयन और सिल्वर जुबली वर्ष में विकास योजनाओं को ज़मीन पर उतारने जैसे अहम कार्यों की ज़िम्मेदारी विकास शील के कंधों पर होगी। उनके दिल्ली और मनीला के अनुभव से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में नए विचार और वैश्विक स्तर की कार्यप्रणाली लेकर आएँगे।

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