
रतनपुर- आदिशक्ति मां महामाया मंदिर रतनपुर में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक चले गुप्त अनुष्ठान, दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठानों का आज विधिवत समापन हुआ। अंतिम दिन माता को नैवैद्य अर्पित कर हवन-पूर्णाहूति की गई, जिसके साथ ही पूरे अनुष्ठान की पूर्णता मानी गई।

समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और माता महामाया के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में पूरे समय धार्मिक वातावरण बना रहा।
मंदिर समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतीश शर्मा ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, जिनमें दो गुप्त और दो प्रत्यक्ष नवरात्रि मानी जाती हैं। आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि कहलाती है, जिसे माता के दस महाविद्या स्वरूपों की साधना और पूजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि देवताओं ने शक्ति प्राप्त करने के लिए माता की आराधना इसी प्रकार के गुप्त अनुष्ठानों के माध्यम से की थी। तभी से गुप्त नवरात्रि में विशेष साधना, मंत्र-जाप और अनुष्ठान की परंपरा चली आ रही है। रतनपुर के महामाया मंदिर में भी इसी परंपरा के अनुसार गुप्त अनुष्ठान करते हुए पूजन किया गया।
नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ, हनुमान पाठ, भैरव पाठ, गौरी-गणेश पूजन सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। नौ दिनों तक ब्राह्मणों द्वारा आदिशक्ति के विभिन्न नामों का जाप, पूजन और विशेष साधना की गई।



