बिलासपुर- ममता, त्याग और संस्कारों की मूर्ति स्वर्गीय श्रीमती सरोजबाला तिवारी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण पारायण सप्ताह का शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत वातावरण में भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।
सुबह सैकड़ों श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर नगर भ्रमण किया। हरि नाम संकीर्तन और “राधे-कृष्ण” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। कलश स्थापना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत कथा का शुभारंभ किया गया।
इस पावन अवसर पर कथा वाचन की दिव्य धारा आचार्य पं. मुकुल शर्मा द्वारा प्रवाहित की जा रही है। आचार्य ने प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान का नाम, कथा श्रवण और सत्संग ही मानव जीवन का सच्चा आधार है। उन्होंने राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब जीवन अनिश्चित हो, तब प्रभु भक्ति ही सर्वोत्तम मार्ग है।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के अवतार, भक्तों पर उनकी कृपा तथा धर्म स्थापना के संदेश को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान के रूप में श्रीमती मंजरी श्यामसुन्दर तिवारी मधुबाला तिवारी एवं अदिति तिवारी विशेष रूप से पूजन विधि मे दायित्वो का निर्वेहन कर रहे है । मुख्य आचार्य ने विधिवत पूजन-अर्चन कर कथा का शुभारंभ कराया और माँ की पावन स्मृति को नमन किया।
संपूर्ण पंडाल भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। सप्ताह भर चलने वाली इस कथा में गीता पाठ, हवन, भजन-कीर्तन एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाएगा।
माँ के आशीर्वाद और प्रभु कृपा से यह आयोजन सभी श्रद्धालुओं के जीवन में शांति, सुख और सद्भाव का संदेश दे—इसी भावना के साथ कथा का शुभारंभ हुआ



