
वृंदावन धाम हितआश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र और राजा बलि की कथा का हुआ भावपूर्ण वर्णन

उत्तरप्रदेश स्थित वृंदावन धाम हितआश्रम में शर्मा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित झम्मन शास्त्री ने भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र और राजा बलि की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और दान का महत्व समझाया।
कथा के दौरान पंडित झम्मन शास्त्री ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु की सच्ची भक्ति का पता विपत्तियों के समय ही चलता है। उन्होंने भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप द्वारा किए गए अत्याचारों को भगवान विष्णु पर अटूट विश्वास रखते हुए सहन किया और अंततः भगवान स्वयं प्रकट होकर अधर्म का अंत किया।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां केवल परीक्षा नहीं बल्कि ईश्वर पर विश्वास मजबूत करने का अवसर भी होती हैं। श्रद्धालुओं को हर परिस्थिति में धैर्य और भक्ति बनाए रखनी चाहिए।
“दान से धन की होती है शुद्धि”
राजा बलि की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने दान की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग धन कमाने के लिए विभिन्न मार्ग अपना रहे हैं, लेकिन यह नहीं सोचते कि उस धन का समाज और जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अपनी आय का कुछ हिस्सा जनकल्याण और धार्मिक कार्यों में अवश्य लगाएं, क्योंकि दान से धन की शुद्धता होती है।
“भागवत कथा अमृत के समान”
पंडित झम्मन शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा अमृत तुल्य है। वेदव्यास जी ने 18 पुराणों के माध्यम से धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना का संदेश दिया है। वर्तमान समाज में बढ़ रहे द्वेष, कलह, संघर्ष और कटुता को समाप्त करने के लिए सात्विक विचारों और भागवत संकीर्तन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का माध्यम है। कथा श्रवण से व्यक्ति के भीतर संस्कार, संयम और मानवता का भाव जागृत होता है।
कथा के समापन पर महाआरती की गई तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे परिसर में भक्ति रस की धारा बहती रही।



