तीर्थराज प्रयाग महाकुंभ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य भगवान के पावन शिविर मे, भगवत गीता भगवान की वाणी है

तीर्थराज प्रयाग महाकुंभ पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य भगवान के पावन शिविर मे, भगवत गीता भगवान की वाणी है ।इसे सुनने से ही शारीरिक बधाएं दूर हो जाती है। पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह यज्ञ के समापन दिवस में गीता सार की कथा बताते हुए आचार्य श्री झम्मन शास्त्री जी महाराज ने कहा कि सीधे प्रभु के चरण में भगवत गीता पहुंचा देती है ।ऐसे महान ग्रंथ भगवान द्वारा हमें प्राप्त है ।द्वापर युग में गाइ गई गीता भगवान के वाणी द्वारा कलयुग के मानवों को भी ज्ञानी ध्यानी कर्मयोगी बनता है ।महाराज श्री ने खासकर युवाओं को जोड़ते हुए कहा कि इतिहास गवाह है। संस्कृति और भाषा का सम्मान होना चाहिए ।जिस देश में युवा अपने धर्म संस्कृति और भाषा का सम्मान नहीं करते हैं ।उसे देश को परतंत्र होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। अंग्रेजों ने भारत पर 200 साल राज्य कर भारत को 2000 वर्ष पीछे धकेल दिया। श्रेष्ठता को नष्ट कर दिया शास्त्री जी ने कहा कि जब तक आप भगवान को अपना सारथी नहीं बनाएंगे आपकी गाड़ी यानी कि आपका शरिर किसी भी क्षेत्र में लक्ष्य को साधने के लिए सही नही होगा।हमे पहले अपनी संस्कृति पर गौरव होना चाहिए। वैसे भी भारत देश और इसके सनातनी लोग ने कभी भी दूसरी भाषा दुसरे धर्म के लोगों को परेशान नहीं किया ना ही उनके धर्म को अपमानित किया नाही किसी को अपने धर्म को मानने से रोकने की कोशिश की जबकि सनातन धर्म को हजारों साल से लगातार जख्म मिल रहा है। हमारे देश के युवा भगवान के इस मार्ग में चले तिलक छोटी धोती अपने वस्त्र आभूषण परिवेश पर गर्व करे। देश को विश्व गुरु होने से कोई नहीं रोक सकता।



