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नट समुदाय को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने सामाजिक चिंतन बैठक, शिक्षा और स्वरोजगार पर जोर

लोरमी/मुंगेली। नट (डंगचगहा) समुदाय में पीढ़ियों से चली आ रही भिक्षावृत्ति की प्रथा को समाप्त कर समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से ग्राम हरदीबांध में सामाजिक चिंतन बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र, रोजगार और शासकीय योजनाओं से समुदाय को जोड़ने सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
लोरमी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री अरूण साव के संरक्षण, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन तथा राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित प्रधान पाठक एवं प्रांतीय संयोजक डॉ. सत्यनारायण तिवारी के संयोजन में यह पहल की जा रही है।
भिक्षावृत्ति छोड़ शिक्षा और रोजगार से जोड़ने का संकल्प
प्रयास के द्वितीय चरण में मुंगेली जिले के विभिन्न गांवों में निवासरत नट समुदाय के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसका उद्देश्य समुदाय को भिक्षावृत्ति से मुक्त कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान तलाशना रहा।
बैठक में सामने आया कि स्थायी रोजगार के साधनों की कमी, सरकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव और जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाना समुदाय के विकास में बड़ी बाधा है। जाति प्रमाण पत्र के अभाव में कई परिवार छात्रवृत्ति, शिक्षा, रोजगार और आरक्षण सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जाति प्रमाण पत्र बनवाने की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष प्रयास किया जाएगा। साथ ही भिक्षावृत्ति को छोड़ने, बच्चों का शत-प्रतिशत स्कूलों में नामांकन कराने और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
युवाओं को हस्तशिल्प, स्वरोजगार और कौशल विकास योजनाओं से जोड़कर सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
डॉ. तिवारी बोले—शिक्षा ही बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम
डॉ. सत्यनारायण तिवारी ने कहा कि भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या को समाप्त करने और समाज को आत्मनिर्भर बनाने का सबसे सशक्त माध्यम शिक्षा है। उन्होंने कहा कि नट समाज के विकास में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए लोरमी विधायक एवं उपमुख्यमंत्री अरूण साव से मिलकर समस्याओं के उचित निराकरण का प्रयास किया जाएगा।
बैठक का संचालन शिक्षक अमित के.डी. ने किया। उन्होंने कहा कि “गरीबी और कुरीतियों की जंजीरों को तोड़ने की ताकत केवल शिक्षा में है। शिक्षा से आने वाली कई पीढ़ियों की तकदीर बदली जा सकती है।”
बैठक की अध्यक्षता ग्राम पंचायत हरदीबांध के पूर्व सरपंच सुरेश कुमार नट ने की। उन्होंने डॉ. तिवारी सहित सभी शिक्षकों और सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “शिक्षा ही वह एकमात्र मार्ग है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को इस दलदल से निकाल सकती है। यदि हम अपने बच्चों के हाथों में कटोरे की जगह कलम देंगे, तभी समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकेंगे।”
बैठक में घोसर्रा से जितेन्द्र नट, खपरी (कलां) से प्रकाश नट, भूरका से वीरेन्द्र नट, सेतगंगा से अशोक नट, डोड़ा से कमलेश नट, गोंड़खाम्ही से गोविन्द नट एवं दीपक कुमार नट सहित हरदीबांध से सुरेश कुमार नट, अमृत लाल नट, रोहित नट, आशीष नट, अशोक नट तथा बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं उपस्थित रहीं।

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