प्रदेश संयोजक सहकारिता विभाग प्रवीण कुमार दुबे ने धान उपार्जन व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग

जांजगीर चाम्पा -भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ के सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रवीण कुमार दुबे ने प्रदेश में संचालित धान उपार्जन केंद्रों की वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने राज्य सहकारी विपणन संघ को पत्र लिखकर समिति स्तर पर उत्पन्न हो रही तकनीकी, प्रशासनिक और व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराया है।
प्रवीण कुमार दुबे का कहना है कि खरीफ विपणन वर्ष के तहत संचालित धान उपार्जन केंद्रों पर तकनीकी अव्यवस्थाओं के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल किसान प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि शासन की कृषक-हितैषी छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई पात्र किसान अब तक एप्लीकेशन पंजीयन नहीं करा पाए हैं। तकनीकी खामियों के चलते किसान धान विक्रय से वंचित हो रहे हैं, वहीं समिति स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में समस्या और गंभीर होती जा रही है।
प्रदेश संयोजक ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व वर्षों में जिन वनभूमि धारक किसानों का धान शासन द्वारा नियमित रूप से खरीदा जाता रहा है, उन्हें इस वर्ष उपार्जन व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है। इससे ऐसे किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है और यह स्थिति न्यायसंगत नहीं कही जा सकती।
प्रवीण कुमार दुबे के अनुसार टोकन निर्माण प्रक्रिया भी किसानों के लिए बड़ी बाधा बन गई है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण उन्हें बार-बार उपार्जन केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिदिन निर्धारित धान उपार्जन सीमा वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। इससे समितियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है और किसानों को समय पर अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
प्रदेश के अधिकांश उपार्जन केंद्रों में धान का अत्यधिक भंडारण हो चुका है, लेकिन समय पर उठाव और परिवहन की व्यवस्था नहीं होने से उपार्जन कार्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही समितियों को आर्थिक नुकसान का सामना भी करना पड़ रहा है।
प्रवीण कुमार दुबे ने शासन से मांग की है कि धान उपार्जन व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के लिए शीघ्र आवश्यक निर्णय लिए जाएं, ताकि किसान और सहकारी समितियां बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से कार्य कर सकें



