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द्वापर युग की परंपरा को संजोए रंग पंचमी का त्योहार: आनंद और उल्लास का प्रतीक डॉ. मंजू भट्ट

द्वापर युग की परंपरा को संजोए रंग पंचमी का त्योहार: आनंद और उल्लास का प्रतीक डॉ. मंजू भट्ट

रंग पंचमी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो होली के पांचवें दिन मनाया जाता है। यह पर्व रंगों, आनंद और उल्लास का प्रतीक है, जो द्वापर युग की परंपराओं को संजोए हुए है। यह कहना है डॉक्टर सी सी रमन यूनिवर्सिटी के सहायक प्राध्यापक श्रीमती मंजू भट्ट का इनका मानना है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखाओं और गोपियों के साथ रासलीला करते हुए रंग खेला था। तभी से यह पर्व प्रेम, भक्ति और मस्ती का परिचायक बन गया।

द्वापर युग की परंपरा से जुड़ा पर्व

डॉ मंजू भट्ट ने बताया किपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में वृंदावन, गोकुल और बरसाना में रंग पंचमी का विशेष महत्व था। भगवान कृष्ण अपनी प्रिय राधा और गोपियों के साथ रंगों से होली खेलते थे। इस अवसर पर चारों ओर अबीर-गुलाल उड़ता था और वातावरण भक्ति और प्रेम से सराबोर हो जाता था। रंग पंचमी इसी अलौकिक परंपरा की याद दिलाती है।

रंग पंचमी का आध्यात्मिक महत्व

इनका कहना है कि रंग पंचमी केवल एक रंगों का पर्व नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक महत्व भी है। मान्यता है कि इस दिन रंग खेलने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। भारतीय संस्कृति में रंगों को जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद का प्रतीक माना गया है।

उल्लास और सामाजिक समरसता का पर्व

रंग पंचमी का त्योहार सामाजिक समरसता को भी दर्शाता है। इस दिन लोग जात-पात, ऊंच-नीच, भेदभाव को भुलाकर प्रेम और भाईचारे के रंग में रंग जाते हैं। घर-घर में पकवान बनाए जाते हैं, ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूमते हैं और रंगों की मस्ती में सराबोर हो जाते हैं।

समय के साथ बदलती परंपराएं

प्राचीन समय में रंग पंचमी प्राकृतिक रंगों से खेली जाती थी, जो त्वचा और पर्यावरण के लिए सुरक्षित होती थी। लेकिन आधुनिक समय में कृत्रिम रंगों का प्रचलन बढ़ गया है, जिससे त्वचा और स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। इसलिए, इस पावन पर्व को प्राकृतिक रंगों और गुलाल से खेलना ही उचित है, जिससे इसकी पारंपरिक पवित्रता और सौंदर्य बरकरार रहे।
रंग पंचमी द्वापर युग की एक पवित्र परंपरा है, जो आज भी प्रेम, उल्लास और भक्ति का प्रतीक है। यह त्योहार हमें आनंदित करने के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और आपसी प्रेम का संदेश भी देता है। आइए, इस पावन पर्व को उल्लासपूर्वक मनाते हुए अपने जीवन को खुशियों के रंगों से भरें।

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